Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Local Samachar
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Local Samachar
    Home»देश»1920 में मुसलमानों ने खुद को नहीं माना था अल्पसंख्यक; AMU केस में SC में वकील की दलील…
    देश

    1920 में मुसलमानों ने खुद को नहीं माना था अल्पसंख्यक; AMU केस में SC में वकील की दलील…

    By January 31, 2024No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    1920 में मुसलमानों ने खुद को नहीं माना था अल्पसंख्यक; AMU केस में SC में वकील की दलील…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    सुप्रीम कोर्ट के 7 जज की संविधान पीठ को केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय महत्व के एक संस्थान में ‘राष्ट्रीय संरचना’ झलकनी चाहिए।

    सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि बिना आरक्षण के भी ‌एएमयू में पढ़ने वाले लगभग 70 से 80 फीसदी छात्र मुस्लिम हैं। मेहता ने कहा कि मामले में फैसला करने में सामाजिक न्याय एक बहुत ही निर्णायक कारक होगा।

    मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली संविधान पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि आपको इस बात को ध्यान में रखना होगा कि पक्षकारों के बीच यह लगभग स्वीकृत स्थिति है कि आरक्षण के बिना भी, एएमयू में 70 से 80 फीसदी छात्र मुस्लिम हैं।

    सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ‘मैं धर्म पर नहीं हूं, यह एक बहुत ही गंभीर घटना है। मेहता ने पीठ के समक्ष अपनी लिखित दलीलें भी पेश की है।

    इसमें कहा है कि एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 (2012 में संशोधित) की धारा 3 के तहत आरक्षण नीति लागू करने की आवश्यकता नहीं है।

    संविधान पीठ ने कहा कि 1981 के कानून में संशोधन को पेश करने का तत्कालीन सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक तथ्यों को पहचानना था। पीठ ने आगे कहा कि तब के केंद्रीय मंत्री यह कहते हैं कि यह पहचानना था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की स्थापना भारत के मुसलमानों ने की थी।

    संविधान पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए एएमयू अधिनियम 1920 में संशोधन विधेयक पर 1981 में संसद में हुई बहस का हवाला दिया।

    चुनाव घोषणाापत्र का हिस्सा था
    सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि संसद में तत्कालीन समाजिक कल्याण मंत्री ने कहा कि ‘यह हमारे चुनाव घोषणापत्र का हिस्सा था और मैं इसे उस पर छोड़ता हूं…यदि संसद को सौ साल के इतिहास को मान्यता देने की अनुमति दी जाए तो अदालत खतरे को पहचान सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘यह संसद का विशेषाधिकार क्षेत्र है, हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते।’ संविधान पीठ एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे बहाल रखने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के छठेवीं सुनवाई कर रही थी। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ के अलावा, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जे.बी. पारदीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा भी शामिल हैं।

    अल्पसंख्यक होना राजनीतिक अवधारणा है
    प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ को बताया कि मुस्लिम होना एक बात है और अल्पसंख्यक होना दूसरी बात। उन्होंने कहा कि ‘हमारे सामने वास्तव में जो प्रश्न है, वह यह है कि क्या वे अल्पसंख्यक द्वारा स्थापित और प्रशासित है।

    उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि वे (मुस्लिम) आज यूपी में अल्पसंख्यक हैं कि वे उस प्रासंगिक समय में अल्पसंख्यक थे, क्योंकि क्या वे अल्पसंख्यक थे अल्पसंख्यक हैं या नहीं, इसका फैसला आज के मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए।

    वरिष्ठ अधिवक्ता द्विवेदी ने कहा कि अल्पसंख्यक एक ‘राजनीतिक अवधारणा‌’ है। उन्होंने कहा कि  उस समय मुसलमानों ने खुद को कभी अल्पसंख्यक नहीं बल्कि एक ‘राष्ट्र’ माना।

    उन्होंने कहा कि इतिहास से पता चलता है कि जब 1920 में एएमयू अधिनियम पारित किया गया था तब मुसलमानों ने न तो खुद को अल्पसंख्यक माना था और न ही ब्रिटिश भारत सरकार ने उन्हें संप्रदाय के आधार पर वर्गीकृत किया था।

    100 से अधिक वर्षों के बाद एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने से राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में इसकी प्रतिष्ठा खतरे में पड़ जाएगी, खासकर तब जब एएमयू ने 40 वर्षों से अधिक समय तक सुप्रीम कोर्ट के 1967 के अज़ीज़ बाशा फैसले को चुनौती नहीं देने का फैसला किया, जिसने इसे गैर-अल्पसंख्यक संस्था घोषित कर दिया था। 

    Related Posts

    ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, दो माओवादी मारे गए, मृतकों में रश्मि शामिल

    February 23, 2026

    शरद पवार परिवार में खुशखबरी: सुप्रिया सुले की बेटी रेवती की सारंग संग सगाई, नागपुर से जुड़ा रिश्ता

    February 11, 2026

    विध्वंस के 1000 साल बाद सोमनाथ में भव्य महाशिवरात्रि, 5 लाख श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

    February 11, 2026

    गौमूत्र पर विश्वास: नवजोत कौर सिद्धू का कहना – स्नान व सेवन से मिली ताकत, कैंसर से निबटने में मदद

    February 2, 2026

    1️जनवरी में यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, 28.33 लाख करोड़ रुपये का हुआ लेन-देन

    February 2, 2026

    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 24 घंटे उड़ानें शुरू

    February 2, 2026
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    खेल अनुशासन, ईमानदारी और लक्ष्य के प्रति समर्पण भाव से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है : सांसद विजय बघेल

    August 31, 2026

    छत्तीसगढ़ ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को किया सुदृढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर दिया जोर….

    August 31, 2026

    प्लेसमेंट एजेंसी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की बड़ी कार्रवाई, 10 लाख रूपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात….

    August 31, 2026

    विष्णु भैया की योजना बनी सावित्री का सहारा, आर्थिक चिंता से मिली राहत, महतारी वंदन की 31वीं किस्त से बढ़ा आत्मविश्वास, सावित्री बोलीं- “हर महीने की मदद बनी आत्मनिर्भरता का संबल”….

    August 31, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - Roshni Rajput
    मोबाइल - 9399298630
    ईमेल - [email protected]
    छत्तीसगढ़ कार्यालय - Amrit Niwas,Gandhi Nagar Gudhiyari Raipur
    मध्यप्रदेश कार्यालय - S-215 Om Complex Near Bima Kunj Kolar Road Bhopal
    September 2026
    M T W T F S S
     123456
    78910111213
    14151617181920
    21222324252627
    282930  
    « Aug    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.